FBI के “ऑपरेशन हार्ड बॉल” में बड़ा खुलासा: लॉरेंस बिश्नोई,जग्गू भगवानपुरिया से लेकर होशियारपुर के SHO तक,
पंजाबी गैंग्स का अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क बेनकाब*
चंडीगढ़,8 जुलाई,
अमेरिका के कैलिफोर्निया में तीन बड़ी संघीय चार्जशीटें खोली गई हैं जिनमें बताया गया है कि कैसे पंजाब से जुड़े गैंगस्टर नेटवर्कों ने हत्या, रंगदारी और ड्रग तस्करी का एक अंतरराष्ट्रीय साम्राज्य बना लिया है जो लॉस एंजिल्स से लेकर कनाडा के सरे, ब्रिटिश कोलंबिया और पंजाब की जेलों तक फैला है। अमेरिकी न्याय विभाग ने “ऑपरेशन हार्ड बॉल” के तहत अमेरिका, कनाडा और यूरोप में 24 गिरफ्तारियां की हैं। ये कार्रवाई भारत से जुड़े तीन प्रतिद्वंद्वी संगठित अपराध समूहों – लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क, जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क और वैंकूवर के रविंदर सिंह ढांडा उर्फ “जॉन विक” के सिंडिकेट के खिलाफ है। कुल 37 आरोपी हैं जिनमें से 10 फरार हैं, सात अमेरिका में, दो भारत में और एक यूरोप में।
बिश्नोई चार्जशीट में सबसे अहम आरोप ये है कि लॉरेंस बिश्नोई और उसके नॉर्थ अमेरिका के दाहिने हाथ सतिंदरजीत सिंह उर्फ गोल्डी बराड़ ने 18 जून 2023 को कनाडा के सरे में गुरु नानक सिख गुरुद्वारे से निकलते समय एक व्यक्ति “एच.एस.एन.” की हत्या का आदेश दिया था। संघीय अभियोजकों ने पुष्टि की है कि एच.एस.एन. सिख अलगाववादी नेता हरदीप सिंह निज्जर हैं जिनकी हत्या के बाद भारत और कनाडा के बीच राजनयिक विवाद हुआ था। चार्जशीट में कहा गया है कि दो अन्य अज्ञात साथियों ने गोली चलाई और बिश्नोई ने हत्या के लिए फोटो और कई पते दिए थे तथा सार्वजनिक रूप से जिम्मेदारी ली थी। इसी नेटवर्क को न्यूयॉर्क में सिख अलगाववादी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की एक अन्य साजिश से भी जोड़ा गया है जिसे एफबीआई ने नाकाम कर दिया था। कनाडा और अमेरिका दोनों ने आरोप लगाया है कि दोनों साजिशें कथित रूप से भारत सरकार के निर्देश पर हुईं जिसको लेकर भारत इस बात से साफ इनकार कर चुका है। एक भारतीय नागरिक निखिल गुप्ता ने इस साल की शुरुआत में मैनहट्टन की संघीय अदालत में पन्नू की हत्या की साजिश में साजिश रचने का जुर्म कबूल किया है जबकि उसके कथित साथी पूर्व भारतीय सरकारी अधिकारी विकास यादव अभी फरार हैं।
चार्जशीट के अनुसार तीनों संगठन एक ही तरीके से काम करते थे। नेता भारतीय जेलों से तस्करी करके लाए गए फोन के जरिए ऑपरेशन चलाते थे। पंजाब के गरीब गांवों के नाबालिगों को भर्ती करके हिंसा करवाई जाती थी और धंधे का आधार विदेश में बैठे कारोबारियों और सांस्कृतिक हस्तियों से रंगदारी वसूलना और अमेरिका-कनाडा सीमा पर बड़ी मात्रा में कोकीन और मेथामफेटामिन की तस्करी था।
बिश्नोई नेटवर्क में बिश्नोई, बराड़, यूरोप के प्रमुख रोहित गोदारा और सुखराज सिंह कंग सहित नौ लोगों पर रैकेटियरिंग साजिश, होब्स एक्ट के तहत रंगदारी साजिश, छह बार रंगदारी की कोशिश और कोकीन व मेथामफेटामिन की तस्करी साजिश के आरोप हैं। एफबीआई ने लॉस एंजिल्स में एक अंडरकवर एजेंट को कर्जदार बनाकर स्टिंग किया था। वायरटैप की गई कॉलों में बराड़ को पीड़ित को धमकाते हुए सुना गया – “मैं मजाक नहीं करता… तुम्हें खत्म करने में मुझे एक घंटा लगेगा” – जबकि उसके खास “भुलवान” ने कहा कि अगर भुगतान बंद हुआ तो परिवार को भुगतना पड़ेगा। चार्जशीट में समूह को कैलिफोर्निया के फॉन्टाना, थाउजेंड ओक्स और स्टॉकटन और सरे व यूके में पीड़ितों को धमकी और रंगदारी की मांग भेजने से भी जोड़ा गया है। मार्च 2024 से जुलाई 2025 के बीच इस गिरोह पर लॉस एंजिल्स क्षेत्र में प्रतिद्वंद्वी तस्कर समूहों से लगभग 520 किलोग्राम कोकीन चुराने का आरोप है।टी
जग्गू भगवानपुरिया नेटवर्क में संस्थापक जग्गू भगवानपुरिया से जुड़े 17 लोगों पर रैकेटियरिंग, किडनैपिंग, हथियारों की तस्करी और ड्रग साजिश के आरोप हैं। चार्जशीट का सबसे असामान्य आरोप होशियारपुर जिले में तैनात पंजाब पुलिस अधिकारी गुरिंदरजीत सिंह के खिलाफ है। आरोप है कि उसने आरोपी गुरलाल सिंह के साथ मिलकर एक हत्या के शिकार के पिता और बहन को झूठे आरोप में फंसाया और फिर केस से नाम हटाने के बदले पैसे मांगे। ये रंगदारी धमकी से नहीं बल्कि भारतटी की आपराधिक न्याय व्यवस्था की मशीनरी के जरिए की गई। चार्जशीट में फॉन्टाना, सांता क्लैरिटा, बेकर्सफील्ड और स्टीवेन्सन रैंच के पार्किंग लॉट्स से AK-47 के पार्ट्स, घोस्ट गन और मशीनगन कन्वर्जन डिवाइस बेचने के हथियार तस्करी ऑपरेशन का भी जिक्र है।
तीसरी चार्जशीट ढांडा और सरे के जसकरण बाघरी और नौ अन्य लोगों के खिलाफ है। इसमें आरोप है कि ये लोग हर हफ्ते सैकड़ों किलोग्राम कोकीन और मेथामफेटामिन की सीमा पार तस्करी करते थे और इसमें कनाडा की सीमा एजेंसी के अंदर के एक सूत्र ने तस्करों को जांच के समय और प्रवर्तन गतिविधि के बारे में जानकारी दी थी।
अमेरिकी अधिकारियों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। फर्स्ट असिस्टेंट यूएस अटॉर्नी बिल एसायली ने कहा कि डर, ड्रग्स और हिंसा फैलाने वाले ट्रांसनेशनल आपराधिक गिरोहों को “न्याय की पूरी ताकत” का सामना करना पड़ेगा और “इन गुंडों के लिए कोई सुरक्षित पनाहगाह नहीं है।” एफबीआई लॉस एंजिल्स फील्ड ऑफिस के नेतृत्व ने इस ऑपरेशन को उन संगठनों पर प्रहार बताया जिन्होंने अमेरिका के अंदर हिंसा के जरिए “परिवारों को आतंकित किया” और “जानें लीं”।


